
केन्द्र सरकार कभी भी नही चाहेगी E- कॉमर्स पर प्रतिबंध लगाना है यह बात सभी ट्रेड एसोसिएशन को अच्छी तरह से समझ लेना चाहिए ।
कारण E – कॉमर्स पर अधिकांश सामान B to C को बिक्री होता है अर्थात सीधे उपभोक्ताओं की IGST लगा कर इनवॉइस की जाती है ।
इस तरह E कॉमर्स से नुकसान केवल और केवल राज्य सरकारों की हो रहा है उनके राज्य में गुड्स का फाइनल उपभोग होने के बाउजूद उन्हें GST राजस्व का कोई भी हिस्सा नहीं मिल रहा है ।
फिर भी पूरे भारत की राज्य सरकारें मौन है समझ से परे है…..??????
सुझाव
(1)हम सबको रिटेल व्यवसाय को बचाने के लिये राज्य सरकारों को जागरूक करना होगा कि राज्यो का राजस्व E कॉमर्स के कारण से कम हो रहा है न कि रिटेल ट्रेडर्स के कारण से ।
(2) राज्य सरकारो के सभी संस्थान जो GST में रजिस्टर्ड नही है या GST के क्रेडिट का लाभ नही लेते है उन्हें केवल औऱ केवल अपने राज्य में रजिस्टर्ड GST रेगुलर रजिस्टर्ड व्यापारी/ निर्माता से ही समान व सेवाएं खरीदनी चाहिये । केवल ऐसा कर ही राज्य सरकारों को GST का लाभ मिल सकता है ।
(3) अधिकांश कंपनिया दिल्ली ,मुम्बई व कोलकाता में रजिस्टर्ड है अब चुकी ROC रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज़ का कार्य पूर्ण रूप से ऑनलाइन हो चुका है । अतः कम्पनियो की जिस राज्य में उत्पादन गतिविधिया है केवल उस राज्य की इनकम टैक्स राजस्व का हिस्सा मिले जो वर्तमान में 42% है न कि उन राज्यों की जिस राज्य में कम्पनियो का रजिस्टर्ड आफिस है।
जैसे NDMC ,SAIL ,COAL india इत्यादि की इनकम टैक्स आय का हिस्सा छत्तीशगढ़ सरकार को मिलना चाहिए ।