
अगर वास्तव में भरस्टाचार कोकम करना है तो वर्तमान में जब तक अधिकारीओ को ease of doing bussiness के मायने समझ मे नही आवेगा। देश मे नए रोजगार बढने की संभावना बहुत कम है
एक भारत
श्रेष्ठ भारत
सरकार द्वारा अपने राजस्व प्राप्त करने वाले किसी भी विभाग को टारगेट नही देना चाहिए कि
इस साल इतना इंकम टैक्स मिलना चाहिए इतना GST मिलना चाहिए इतना संपति कर मिलना चाहिए
टारगेट देंगे तो डिपार्टमेंट व्यापारियों के साथ अमानवीयता पूर्वक टैक्स वसूलने के लिए बाध्य होता है
पावर के साथ अगर टारगेट भी दे देंगे तो अमानवीयता होगी ही
जबकि अमानवीयता तो मानव मानव के बीच कभी होनी ही नही चाहिए
प्रकृति यह बिल्कुल भी पसंद नही करती है कि कोई भी व्यक्ति किसी के साथ भी किसी भी प्रकार की अमानवीयता करे
इस बात का ध्यान व्यक्ति को भी रखना होगा और सरकार और उनके सभी विभागों को भी रखना होगा कि किसी के साथ भी अमानवीयता न हो जावे अन्यथा शासन शोषण में बदल जाता है
साथ ही पेनाल्टी ,व ब्याज के रूप मे वसूली गई राशि की सभी सरकारी विभागों द्वारा राज्य के केस में ग्राहक/करदाता सहायता फण्ड के रूप मे अलग से 5 वर्षों तक रखना होगा तथा 5 वर्षों बाद बचत राशि को मुख्य मंत्री सहायता कोष में जमा करना होगा न कि इस राशि को विभाग की वार्षिक आय मद में जमा *
ठीक उसी तरह केन्द्रीय राजस्व के केस में प्रधानमंत्री राहत कोष में जमा कराया जाना चाहिए।
इस तरह का कानून शीघ्र बनाया जाना चाहिए ताकि जबरिया टारगेट वसूली पर लगाम लग सके।
सरकार को अपने कानून व नियमो को इस तरह पारदर्शी बनाना चाहिये जिससे कर अपवंचन के प्रवित्ति पर लगाम लगाई जा सके
साथ ही देश मे व्यापक रूप से व्याप्त भ्रस्टाचार पर लगाम लगाने सार्थक कदम उठाये जाने चाहिए
सुझाव
तत्काल एक पार्लियामेंट्री कमेटी बना कर इस बात की तहकीकात कर एक स्वेत पत्र जारी करना चाहिये कि नोट बंदी के समय देश मे ₹17.74 लाख करोड़ की करेंसी सर्क्युलेशन में थी जो तत्कालीन GDP का 12.5% थी ।
वर्तमान में सितंबर 2021 में ₹ 29.97 लाख करोड़ की करेंसी सर्क्युलेशन में है जो GDP का 14.5% है। जबकि देश मे डिजिटल भुगतान भी अपने पीक पर है।
अतः विषय जिन पर डिटेल स्टडी की जरूरत है
(1) कही देश के शेयर बाजार व कमोडिटी बाज़ार में यह धन P नोट के माध्यम से रि-रुट होकर तो नही आ रहा है । जिससे सरकारे विदेशी निवेश मान रही है।
(2)देश में लोगो का रुझान निवेश के लिये सोने (Gold) को ओर तो नही बढ़ा है जो तस्करी होकर देश मे सतत आ रहा हो
(3)भरस्टाचार करके इकठा किया गया धन पुनः मार्किट में आने के बजाय गोल्ड में निवेश किया जा रहा है ।
एक अनुमान के अनुसार देश मे करीब 1000 मीट्रिक टन गोल्ड प्रति वर्ष घरेलू खपत के लिये आयात हो रहा है जिसकी कीमत करीब ₹ 4.5 लाख करोड़ है ।
अगर हम इस ₹4.5 लाख करोड़ के गोल्ड आयात को रोकने में सफल हो जाते है तो देश मे प्रति वर्ष ढांचा गत परियोजना के विकास के लिये यह राशि प्रति वर्ष अतरिक्त उपलब्ध होगी ।
साथ ही इस राशि से सरकार को अतिरिक्त टैक्स भी मिलेगा ।
अतः तत्काल गम्भीरता से यह स्टडी करने की जरुरत है कि डिजिटल भुगतान अपने पीक में होने के बावजूद करेंसी इतनी अधिक मात्रा (GDP का14.5%)में सर्क्युलेशन में क्यो है ….???
जब तक हम रिस्वत देने वाले को भी बराबर का दोषी मानते रहेंगे यह हम अनजाने में भरस्टाचारी अधिकारी की मदद कर रहे है ।और व सक्छ (गवाह) के अभाव के कारण वे बचते रहेंगे।
अतः अब समय आ गया है भ्रस्टाचार व रिस्वत खोरी रोकने के लिये कानून में केवल लेने वाले को ही दोषी माना जावे
पूरा व्यापार जगत रिस्वत खोरी व भ्रटाचार व अवैध वसूली से परेशान है ।
अतः वास्तव में रिस्वत खोरी व भ्रस्टाचार को रोकना है तो तो रिस्वत का सक्छ उपलब्ध करवाने वाले को क़ानून बनाकर कर इम्युनिटी देने की लिखित गारण्टी देनी होगी तब ही भ्रटाचार व रिस्वत खोरी को रोका जा सकता है ।
व उस व्यापारी के व्यापार को कोई भी अधिकारी किसी भी तरह की भविष्य में बाधा उत्पन्न नही करेगा यह सरकार का स्पस्ट संदेश होना चाहिये