बैंकों व सरकारी उपक्रमों का निजीकरण (निजी हाथों में सौपा जाना) किसी भी समस्या का स्थायी हल नही है

0
test

वर्तमान में हमने देखा है कि कई छोटे निजी व सहकारिता छेत्र के बैंक व निजी छेत्र के बड़े व छोटे हज़ारो उद्योग बंद हुए है व उनका लोन एकाउंट NPA हो गया है । ऐसा होने से आम जनता का ही नुकसान हुआ है ।

अतः कोई सरकारी उपक्रम public sector undertaking हो या निजी छेत्र का उधोग हो हमेशा की तरह नुकसान केवल आम डिपॉजिटर जिनका पैसा बैंको में जमा है का ही होता है ।

वर्तमान में बेवजह देश मे स्टील की कीमतें एक वर्ष में बढ़कर दो गुनी हो गई है। जबकि देश के सभी प्राइमरी स्टील निर्माता व निजी छेत्र के सभी बड़े स्टील निर्माताओ के पास खुद के कैप्टिव यूज़ के लिये आयरन ओर व कोयले को खदाने है । जिन पर किसी भी तरह की रॉयल्टी व टैक्स में बढ़ोतरी सरकार ने नही की है।

साथ ही राज्य सरकारो ने भी बिजली की दरों व लेबर रेट में कोई बढ़ोतरी की है बाकि कोरोना काल मे अधिकारियो व कर्मचारियों की सैलरी करीब 15 से 20% तक कम ही हुई है । इस तरह हम विस्वाश के साथ कह सकते है कि उपरोक्त सभी बढे उधोग जो स्टील निर्माण में लगे हुए है को स्टील निर्माण steel construction में उपयोग होने वाले 98% चीजो को कीमतों में कोई बढ़ोतरी नही हुई है । फिर भी स्टील के दामो का एक वर्ष में लगभग दो गुना हो जाना एक प्राइस कार्टेल इजेशन का हिस्सा है ।

[shortcode-weather-atlas selected_widget_id=f03e2a1b]

हम भारत सरकार व कॉम्पिटिशन कमीशन ऑफ इंडिया से आग्रह करते है कि इस विषय मे तत्काल स्वमं संज्ञान ले कर देश की डाउन स्ट्रीमस्टील,इंजीनेररिंग ,इक्विपमेंट मैनुफैक्चरिंग उधोग को बंद होने से बचावे ।

इस बढ़ी स्टील की कीमतों के कारण से ढाचागत परियोजनायो का काम भी सुस्त पड़ गया है ।

सभी स्टैक होल्डर से आग्रह है कि सभी अपने अपने स्तर पर इस मुद्दे को सरकार के संज्ञान में तत्काल लावे ।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here