Saturday, April 5, 2025
HomeChhattisgarhमीडिया गुरुकुल के जनसंचार शोधार्थियों ने मनाया शिक्षक दिवस

मीडिया गुरुकुल के जनसंचार शोधार्थियों ने मनाया शिक्षक दिवस

- Advertisement -

रायपुर। कुशाभाऊ ठाकरे पत्रकारिता एवं जनसंचार विश्वविद्यालय के जनसंचार शोध केंद्र के शोधार्थियों द्वारा शिक्षक दिवस पर विशेष कार्यक्रमों का आयोजन किया गया। अपने गुरूजनों के सम्मान के लिए शोध छात्र-छात्राओं ने जनसंचार विभागाध्यक्ष एवं जनसंचार शोध केंद्र के अध्यक्ष डॉ. शाहिद अली, जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेन्द्र मोहंती व समाज कार्य विभाग के प्राध्यापक अभिषेक गोस्वामी का श्रीफल एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मान किया।
कार्यक्रम में जनसंचार विभागाध्यक्ष एवं जनसंचार शोध केंद्र के अध्यक्ष डॉ. शाहिद अली ने अपने आशीर्वचन में कहा कि हर छात्र को अपने छोटे-मोटे संघर्ष नजर अंदाज करना चाहिए।

जिसका जितना बड़ा लक्ष्य होगा उसका उतना ही बड़ा संघर्ष भी होगा। छात्रों को एकाग्र-भाव से अपने लक्ष्य को ध्यान में रखते हुए बढ़ना चाहिए। गुरु का अर्थ “अंधकार से प्रकाश” में लाना है किंतु गुरु के ऊपर एक गुरुत्तर भार भी होता है कि वह एक ऐसी पीढ़ी तैयार करें जो अगली पीढ़ी को अंधकार से प्रकाश की ओर लाए। शिक्षक वही हैं जो छात्र के हर संघर्ष पर खड़े मिले तभी वह अपने कार्य के प्रति न्याय कर पाएंगे।

मीडिया गुरुकुल के जनसंचार शोधार्थियों ने मनाया शिक्षक दिवस
मीडिया गुरुकुल के जनसंचार शोधार्थियों ने मनाया शिक्षक दिवस

उन्होने हिंदुस्तानी शास्त्रीय संगीत गायक कुमार गंधर्व की बात को कहते हुए कहा है कि गुरु के सानिध्य में ही शिक्षा की छाया रहती है और उसी से आगे बढ़ने की दिशा तय होती है। पूर्व राष्ट्रपति भारत रत्न डा. ए.पी.जे. अब्दुल कलाम ने कहा था कि ‘‘शिक्षण एक बहुत ही महान पेशा है जो एक व्यक्ति के चरित्र, क्षमता और भविष्य को आकार देता है।’’ उनके इसी उल्लेख को ध्यान में रखकर शिक्षक को कर्तव्य, निष्ठा से देश और समाज के नव-निर्माण में अपना योगदान देना होगा। साथ ही शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी।

सभी शोधार्थियों ने शिक्षकों के योगदान पर अपने विचार अभिव्यक्त किये। साथ ही जनसंचार विभाग के सहायक प्राध्यापक डॉ. राजेन्द्र मोहंती ने कहा कि आप सब शोधार्थी हो, आने वाले समय में आप लोग शिक्षक की भूमिका में होंगे। आप सबका दायित्व है शिक्षक के कर्म को बेहतर तरीके से निभाएं। गुरु के महत्व पर कहा कि जरूरी नहीं है कि गुरु एक हो। हमारे यहाँ एक पौराणिक कथा है कि भगवान अवधूत दत्तात्रेय ने अपने जीवन काल में 24 गुरु बनाए थे। उनका मानना था कि जिस किसी से भी सीखने को मिले वह हमारा गुरु हो सकता है। मधुमक्खी से लेकर हाथी तक तथा बालक भी हमारा गुरु हो सकता है। साथ ही इन्होंने भी शिक्षक दिवस की शुभकामनाएं दी।

[shortcode-weather-atlas selected_widget_id=f03e2a1b]

समाजकार्य विभाग के प्राध्यापक अभिषेक गोस्वामी ने कहा कि ऑनलाईन शिक्षा के समय में भी शिक्षक का सानिध्य आवश्यक है। तथा आधुनिक समाज निर्माण में शिक्षकों की नई भूमिका की बात रखी।
कार्यक्रम का सफल संचालन जनसंचार विभाग की शोधार्थी दीक्षा देशपांडे ने किया। कार्यक्रम के अंत में आभार प्रदर्शन शोधार्थी विनोद सावंत ने किया।
कार्यक्रम में शोधार्थी रूखसार परवीन, रीतुलता तारक, राकेश कुमार, भूपेश कुमार त्रिपाठी , विकास कुमार, चंद्रेश कुमार चौधरी, गायत्री सिंह उपस्थित रहें।

RELATED ARTICLES

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here

Most Popular

Recent Comments