
raipur news . वर्तमान समय में लोगों का जीवन बहुत भागादौड़ी तथा तनाव से गुजर रहा है | अनियमित दिनचर्या व प्रकृति से दूरी बनाकर रखना जो कि विभिन्न प्रकार की बीमारियों के जन्म के लिए उत्तरदायी है | विभिन्न प्रकार की नयी-नयी बीमारियाँ जिसमें बी. पी, शुगर, गठिया, माइग्रेन, हर्निया, थायरॉइड, कैंसर, अस्थमा, पाचनशक्ति का कमज़ोर होना, गर्दन तथा कंधों में अकडन होना इत्यादि प्रकार समस्याओं का समाधान योग, व्यायाम, मेडिटेशन आयुर्वेद औषधि तथा अल्ट्रानेटीव थैरेपी जिसमे एक्यूप्रेशर, मर्म थैरेपी, तथा जल चिकित्सा आदि काफी सहायक है |
यह चिकित्सा पद्धति प्राचीन काल से चली आ रही है क्योंकि पहले ऐलोपैथी दवाये नही मिलती थी और ऐसा भी नहीं है कि लोग बीमार नहीं पड़ते होंगे, उस समय भी लोग बीमार पड़ते थे लेकिन बीमारी उनकी ज्यादा जड़ता ले कि वो अपने बीमारी को समझ कर उसे प्राकृतिक रूप से ही उपचार कर लेते थे | जीव प्रकृति की गोद में रहते हैं, जीव और प्रकृति दोनों ही एक-दूसरे को संरक्षण प्रदान करते थे इसीलिए वो हमेशा स्वस्थ्य जीवन जीते थे और लोगों का खान-पान जलवायु तथा समयानुसार होता था | वर्तमान समय में लोगों का खान-पान तथा दिनचर्या काफी अस्त-व्यस्त हो चुकी है, इसे अच्छा बनाने के लिए सभी को स्वं को और प्रकृति को समझना होगा और इसके लिए योग, व्यायाम तथा प्राकृतिक चिकित्सा को अपनाना पड़ेगा |
“प्रकृति से जुड़िये वो हमारे शत्रु नहीं है अपितु वो हमारे सबसे अच्छे मित्र होते है, जब यह प्रकृति हमारे साथ कोई भेद-भाव नही रखती तो हम क्यों रखते क्योंकि प्रकृति को जो हम देते हैं वही हम वापस पाते भी है।”
योग हमारे जीवन शैली को सुधारता है, हमें जीवन जीना सिखाता है तथा हमें खुद से मिलाता है क्योंकि हम प्रकृति के एक महत्वपूर्ण अंग है। योग का अर्थ है – जुड़ना, संयोग, मिलन | योग के द्वारा हम शारीरिक, मानसिक तथा आध्यात्मिक रूप से एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं | हमारे शरीर और मन में हो रहे विकार, व्याधि व अन्य परिवर्तनों को योग के द्वारा महशूस कर उसे ठीक कर सकते है |
वर्तमान समय में हम सभी के समक्ष एक कोरोना वायरस जैसी समस्या खड़ी है जिसने पूरे विश्व को हिला कर रखा हुआ है इस समस्या में योग, प्राकृतिक तथा आयुर्वेद व्यक्ति के प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने में साथ ही एक नवीन व सुव्यवस्थित जीवनशैली प्रदान करने में काफी सहायक हो सकता है और है भी क्योंकि अभी कोरोना की कोई वैक्सीन नही बन पा रही है लेकिन लोग अपने प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ा कर, इच्छाशक्ति और अपना आत्म-विश्वास बढ़ा कर हम इस चुनौती के सामने खड़े हो सकते है |
आज पूरी प्रकृति में कही न कही हलचल व उथल-पुथल है | प्रकृति और मानवीय जीवन के उत्थान के लिए हम सभी को अपने जीवनशैली को • सुव्यवस्थित करना अति आवश्यक है |
अत: प्रकृति से दूरी मिटाकर हम प्रकृति के अनुसार अपने जीवन-शैली को बेहतर व स्वस्थ्य बना सकते हैं, अपने दिनचर्या व खानपान को अच्छा कर हम एक स्वस्थ जीवन जी सकते हैं.
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