
नॉन बासमती चावल के विदेशो को निर्यात पर 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी लगाना व 100% ब्रोकन राइस के निर्यात को पूर्णत: बैन करने से किसानों को MPS पर सरकारी खरीद के बाद बचत धान करीब 500 लाख टन ₹400 प्रति क्विंटल के हिसाब से करीब ₹20000 करोड़ का अतिरिक्त नुकसान होना निश्चित है ।
निर्यात पर 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी व 100%ब्रोकन के निर्यात पर पूर्ण प्रतिबंध के बाद छत्तीसगढ़ में धान जो ₹2000 से घट कर ₹1600 हो जाने के आधार पर है।
अतः किसानों के हितों की रक्षा एवं ग्रामीण छेत्र में स्थापित छोटी छोटी अरवा मिलो को बीमार होकर बंद होने से बचाने के लिये तत्काल निम्न कदम उठाये जाने की जरूरत है:-
सुझाव
(1) प्रतिमाह एक निर्धारित मात्रा करीब 10 लाख टन नॉन बासमती चावल के निर्यात की अनुमति मानवीय आधार पर ह्यूमन कंजम्प्शन के लिये दी जावे ।तथा लगाई गई 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी तत्काल प्रभाव से वापस ली जावे ।जिससे किसानों को उनकी उपज का वाजिब दाम मिल सके ।
(2) एथनोल बनाने व डिस्टलरी के उपयोग में आने वाले 100%,ब्रोकन राइस के मिनिमम भाव धान की MSP के बराबर तय किये जावे । जिससे किसानो को धान का उचित मूल्य भविष्य में भी सतत मिलता रहे ।
*छत्तीसगढ़ में अरवा चावल की कस्टम मिलिंग के दौरान करीब 40 से 42% ब्रोकन राइस उत्पन्न होता है । मिलर को अधिकतम 25% ब्रोकन युक्त 67% चावल बदले में FCI में जमा करना होता है । अतः उसे 16% चावल की प्रतिपूर्ती के लिये ओपन मार्किट में किसान से 24% अतरिक्त धान खरीदना पड़ता है । जो निर्यात में पूर्ण बैन के पूर्व रायपुर बाजार में 100 % ब्रोकन चावल की कीमत ₹2250/प्रति क्विंटल एक्स मिल थीं अब घट कर ₹ 1650 आ गई है ।
इन परिस्थितियों में सरकार का कस्टम मिलिंग का कार्य समय पर पूर्ण हो लगभग असंभव है । जिससे अधिकांश राज्य सरकारों के पास भंडारण की पूर्ण सुविधा नहीं होने के कारण खुले आसमान के निचे धान रखना पड़ता है ।वह भी खराब होने निश्चित है ।
अतः 100%ब्रोकन राइस के निर्यात की प्रति माह एक निश्चित मात्रा कम से कम 5 लाख टन विदेशो को निर्यात की तत्काल अनुमति दी जावे । ताकि किसानों को उनकी उपज का सही दाम मिल सके व कस्टम मिलिंग का कार्य भी न प्रभावित हो व छोटी छोटी अरवा मीले भी बीमार होकर बंद न हो।
साथ ही चावल निर्यात कार्य मे लगे विशाखापटनांम, काकीनाडा ,कांडला पोर्ट व विभिन्न ICD में काम मे लगे मजदूरो को भी सतत रोजगार मिलता रहे ।
चावल के निर्यात पर 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी व ब्रोकन पर बैन लगाने के कारण इस कार्य मे लगे सभी ट्रक खड़े हो गए है व ट्रक मालिको के सामने लोन की EMI चुकाने व ड्राइवरो को सैलरी देने का संकट उत्पन्न हो गया है । जो आने वाले समय मे बैंको के कैश फ्लो को भी खराब कर सकता है । जिसका सीधा प्रभाव ट्रक निर्माताओ पर भी पड़ेगा ।
इस तरह 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी हटाकर निर्यात की तत्काल अनुमति देना ही सभी पकछो के हित मे है ।
अतः सभी स्टैक होल्डर से आग्रह है कि जमीनी हकीकत व उसके समग्र रूप से पड़ने वाले प्रभाव का तत्काल आकलन कर लागू 20% एक्सपोर्ट ड्यूटी तत्काल वापस ली जावे । क्योकि नवंबर माह में खरीफ की फसल कृषि मंडियों में आ जावेगी ।