BIG NEWS : कोरोना महामारी के बीच आई एक और नई बीमारी, जाने इसके बारे में

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दुनिया भर में कोरोना वायरस संक्रमण (Coronavirus) अब भी कम नहीं हुआ है. कुछ देशों में इसके नए मामले बढ़ रहे हैं. चीन में भी कोरोना से फिर बुरा हाल है. चीन ने कई शहरों में कड़े प्रतिबंध लगा दिए हैं. इस बीच नाइजीरिया (Nigeria) में एक जानलेवा बुखार तेजी से बढ़ रहा है. इस बुखार का नाम लासा बुखार (Lassa Fever) है. आशंका जताई जा रही है कि यह बुखार दुनिया के सामने कई चुनौतियां खड़ी कर सकता है.
नाइजीरिया सेंटर फॉर डिसीज कंट्रोल (एनसीडीसी) ने जानकारी दी है कि नाइजीरिया में इस साल 88 दिनों में लासा बुखार से 123 लोग अपनी जान गवां चुके हैं. अब तक 659 लोगों में लासा संबंधी संक्रमण की पुष्टि हुई है. यही नहीं, यह बुखार ब्रिटेन तक भी पहुंच गया है. वहां दो मरीजों में इसक पुष्‍टि हुई है, जबकि एक मरीज दम तोड़ चुका है.
कहा जा रहा है कि लासा बुखार को मात देने वाले 25 फीसदी मरीजों में बहरापन होता है. इनमें से आधे मरीजों की सुनने की क्षमता तीन महीने के अंदर लौट आती है. वहीं विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन (डब्‍ल्‍यूएचओ) ने जानकारी दी है कि लासा बुखार एक्‍यूट वायरल हैमोरेजिक फीवर होता है. इस बीमारी की पहचान पहली बार नाइजीरिया के लासा शहर में 1969 में हुई थी. इस शहर के नाम पर ही इसका नाम लासा रखा गया।
जानकारी दी गई है कि लासा बुखार का संबंध वायरस के परिवार एरिनावायरस से होता है. यह वायरस चूहों से फैलता है. इसकी चपेट में आमतौर पर अफ्रीकी मल्‍टीमैमेट चूहे आते हैं. घर का सामान या खाना चूहों की गंदगी या यूरिन के संपर्क में आने से संक्रमित हो जाता है. इसके बाद लासा बुखार की बीमारी फैलती है.
डब्‍ल्‍यूएचओ ने बताया है कि यह जानकारी भी सामने आई है कि लासा बुखार की चपेट में आने पर 80 फीसदी लोगों में संक्रमण का पता ही नहीं चलता है. वहीं हर पांच में से एक संक्रमित मरीज को गंभीर परेशानी का सामना करना पड़ता है. लासा वायरस से शरीर के प्रमुख अंगों जैसे लिवर और किडनी के भी प्रभावित होने की जानकारी मिली है. इस बुखार का असर 21 दिनों तक रहता है. हर साल दुनिया में इससे करीब पांच हजार मौतें होती हैं।
लासा वायरस से संक्रमित होने पर तेज बुखार, सिर दर्द, गले में खराश, मांसपेशी में दर्द, सीने में दर्द, डायरिया, खांसी, पेट में दर्द और जी मिचलाने जैसी समस्‍याएं होती हैं. गंभीर मरीजों में चेहरे पर सूजन, फेफड़ों में पानी, मुंह और नाक से खून निकलने लगता है. मरीज के ब्लड प्रेशर में भी तेजी से गिरावट आने लगती है.

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