
Durg news पिछले महीने चोहान अपार्टमेंट के लिफ्ट में फंसकर घायल हुई महिला को मंगलवार को हाईटेक सुपर स्पेशालिटी हॉस्पिटल से छुट्टी दे दी गई। महिला के दोनों पैर सलामत हैं और उनके सभी आपरेशन कर दिये गये हैं। डॉक्टरों ने उम्मीद जताई है कि एक-दो महीने में वे अपने पैरों पर खड़ी हो जाएंगी।
पिछले महीने भिलाई स्थित चोहान स्टेट की लिफ्ट में महिला का पैर बुरी तरह से फंस गया था जिसे उपचार के लिए हाईटेक सुपर स्पेशिलिटी अस्पताल में भर्ती किया गया था जहाँ महिला का उचित इलाज और ऑपरेशन किया व्या जिस से महिला के दोनों पैर सही सलामत ठीक हो गए और महिला को मंगलवार को हॉस्पिटल से डिस हर्ज कर दिया गया घर के लिए रवाना होने से पूर्व मरीज ने अस्पताल के डाक्टरों और नर्सों की प्रशंसा की आपको बता दे कि
सावित्री देवी को ठीक एक महीना पहले आधी रात को हाइटेक सुपरस्पेशालिटी हॉस्पिटल लाया गया था। उनके दोनों पैर कुचल गए थे। महिला ने कहा कि अस्पताल प्रबंधन, डॉ दीपक सिन्हा और नर्सों ने मिलकर असंभव को संभव कर दिखाया है। किसी अस्पताल में इतनी अच्छी देखभाल हो सकती है, इसका उन्हें कोई अंदाजा नहीं था। उन्होंने बच्चे की तरह उनकी देखभाल की और हर जरूरत का ख्याल रखा। उन्हें एक क्षण के लिए भी ऐसा नहीं लगा कि वे अस्पताल में हैं। इतनी अच्छी देखभाल शायद घर पर भी नहीं हो पाती।
सावित्री देवी के पुत्र सौरभ ने कहा कि मोहल्ले वाले ही घायल मां को अस्पताल ले आए थे। उन्हें पहुंचने में आधा घंटा लग गया था। पर तबतक डाक्टरों ने बिना किसी का इंतजार किये इलाज शुरू कर दिया था। इससे न केवल मां की जान बच गई बल्कि उनके पैरों को बचाना संभव हो गया। घर पर बीवी और दो साल की बच्ची थी और अस्पताल में मां। नौकरी पर जाना भी जरूरी था। पर हाइटेक के चिकित्सकों और नर्सों की टीम ने उन्हें एक तरफ से बिल्कुल निश्चिंत रखा।
महिला का इलाज करने वाले डॉ दीपक सिन्हा ने बताया कि दोनों जांघों की हड्डियां कुचल गई थीं। उनकी उम्र 60 साल से अधिक थी और उन्हें मधुमेह की भी शिकायत थी। पैर में रक्त संचार बाधित हो रहा था। पैर संज्ञाशून्य हो चुके थे। दर्द का अहसास भी नहीं था। मरीज का बीपी भी काफी कम था। तीन दिन तक मरीज को आईसीयू में रखा। इसके बाद घुटने के नीचे की हडिड्यों के लिए दोबारा सर्जरी की। एक सप्ताह पहले उनकी आखिरी सर्जरी की गई जिसमें अस्थाई सपोर्ट को हमने हटा दिया और फिर प्लास्टिक सर्जरी कर दी। मंगलवार को मरीज को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। हमने अस्पताल कर्मियों की देखरेख में ही उन्हें शिफ्ट किया क्योंकि मरीज पांचवी मंजिल पर रहती है जबकि इमारत की लिफ्ट अब भी खराब है।